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सेवा की रूहानियत : ईसाई नज़रिया

सेवा की रूहानियत : ईसाई नज़रिया डॉ. एम. डी. थॉमस निदेशक, इंस्टिट्यूट ऑफ हार्मनि एण्ड पीस स्टडीज़, नयी दिल्ली ------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------ सेवा का कोई धर्म नहीं है। सेवा सिर्फ सेवा है। सेवा अपने आप में एक अहम् मूल्य है। वह इन्सानों की होती है। वह सभी इन्सानों के लिए भी होती है। सेवा सभी धर्मों के परे स्वयं एक बेनज़ीर धर्म है। सेवा एक इन्सानी जज़्बात है। वह एक रूहानी साधना है। वह एक बेहतरीन इन्सान का गुण है। सेवा एक सुलझे हुए और शरीफ इन्सान की पहचान भी है।   ईसाई परंपरा में सेवा के एक जबर्दस्त दर्शन हैं, जिसकी बुनियाद ईसा की शख्सियत खुद है, उनकी ज़िंदगी है। उसमें सेवा का नज़रिया काफी सार्वजनिक, सार्वभौम, सामाजिक और रूहानी है। सेवा का ईसाई नज़रिया सिर्फ ईसाइयों के लिए हो, ऐसा तो नहीं है। सेवा के बारे में जो भी बातें हैं, चाहे किसी भी परंपरा से हो, वे सभी इन्सानों के लिए बराबर तौर पर लायक हैं। ईसा के मसीहाई अवतार का मकसद इन्सान और इन्सानियत की सेवा करना था। ईसा ने कहा था, ‘‘मैं सेवा करा

Celebrating Life in the Diversity of Cultures

  World Day of Cultural Diversity 2022 / 21 May / Article Celebrating Life in the Diversity of Cultures Fr Dr M. D. Thomas Director, Institute of Harmony and Peace Studies, New Delhi -----------------------------------------------------------------------------------------------------------   The 21 st day of May is the ‘ World Day  of Cultural Diversity for Dialogue and Development’. It is also called ‘world day of cultural diversity’ or even more simply ‘diversity day’. The day was declared by the General Assembly of the United Nations  in 2002, following the adoption of Universal Declaration on ‘ Cultural Diversity’ by UNESCO in 2001.   ‘Celebrating cultural diversity and harmony , along with helping people learn about its importance in life’, was the purpose of declaring this day.  Promoting a culture of diversity is the significance of the day, too. R ecognizing the need to ‘enhance the potential of  culture’  as a means of achieving ‘prosperity, sustainable devel

बुद्ध पूर्णिमा पर ज्ञानोदय हासिल हो

  बुद्ध पूर्णिमा / 16 मई 2022 / लेख बुद्ध पूर्णिमा पर ज्ञानोदय हासिल हो फादर डॉ. एम. डी. थॉमस निदेशक, इंस्टिट्यूट ऑफ हार्मनि एण्ड पीस स्टडीज़, नयी दिल्ली ------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------ 16 मई को ‘बुद्ध पूर्णिमा’ का पर्व मनाया जा रहा है। यह पर्व पाली में ‘वेसाख’ और संस्कृत में ‘वैशाख’ महीने की पूर्णिमा को आता है। इस दिन गौतम बुद्ध का जन्म हुआ था। इस दिन उन्हें ज्ञान, संबोधि या बुद्धत्व हासिल हुआ था। इसी दिन उनका महानिर्वाण भी हुआ था। ऐसी तीन-आयामी ‘पूर्णता’ किसी को एक ही दिन हासिल हुआ हो, शायद वह सारी दुनिया में गौतम बुद्ध की अकेली और अनोखी पहचान है। कहने की ज़रुरत नहीं है कि बौद्ध समुदाय के लिए यह दिन हर प्रकार से स्वर्णिम है। महात्मा बुद्ध के तीन सबसे खास दिनों का मिला-जुला रूप होने के कारण यह दिन उनका सबसे बड़ा और अहम् पर्व भी है। ईसा पूर्व 563 में गौतम बुद्ध का ‘जन्म’ शाक्य गणराज्य की तत्कालीन राजधानी ‘कपिलवस्तु’ के निकट ‘लुंबिनी’ में हुआ था, जो कि इस समय नेपाल में है। बिहार के ‘बो

ईद से समाज में भाईचारे और ज़कात की तहज़ीब बने

ईद-उल-फित्र 2022 / 03 मई / लेख  ईद से समाज में भाईचारे और ज़कात की तहज़ीब बने फादर डॉ. एम. डी. थॉमस   निदेशक, इंस्टिट्यूट ऑफ हार्मनि एण्ड पीस स्टडीज़, नयी दिल्ली ------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------ 03 मई को ‘ईद-उल-फित्र’ का पर्व मनाया जा रहा है। इसे ‘ईद-अल-फितर’ भी कहते हैं। ‘ईद’ का मतलब ‘मनाना’ है और ‘फितर’ का मतलब ‘इफ्तार’, याने रोज़े को तोडऩा। दूजे लफ्ज़ों में, महीने भर के रमज़ानी रोज़े को अंजाम तक पहुँचाते हुए पर्व के तौर पर खुशी का इज़हार करना ‘ईद-उल-फित्र’ है। ज़ाहिर है, यह इस्लामी समुदाय का सबसे बड़ा पर्व है। इस्लामी पंचांग चाँद को बुनियाद मानकर बनाया हुआ है। इसलिए हर महीना नये चाँद के साथ शुरू होता है। नौवाँ महीना रमज़ान रहा और दसवाँ महीना ‘शव्वाल’ होता है। शव्वाल महीने की पहली चाँद रात को ‘अल्फा’ कहते हैं। इसकी अगली सुबह को पर्व के तौर पर मनाने की रिवायत है। चाँद के दीदार के बाद ही ‘ईद-उल-फितर’ का एलान होता है। साफ है, ‘ईद-उल-फितर’ मुसल्मानों के लिए सालाना तौर पर एक नयी शुरूआत होती

To be Creative and Innovative is to Live

  World Creativity and Innovation Day 2022 / 21 April / Article To be Creative and Innovative is to Live Fr Dr M. D. Thomas Director, Institute of Harmony and Peace Studies, New Delhi ----------------------------------------------------------------------------------------------------------- The 21st day of April  is ‘World Creativity and Innovation Day’, as designated by the United Nations. ‘Raising awareness of the role of creativity and innovation in all aspects of human development’ is the objective of the day. Encouraging people to use new ideas, to make new decision and to do creative thinking is the plan of action that is destined to make the necessary effect. This day was officially recognized by the United Nations in 2017. In 2018, a global community was launched, with educators, creative entrepreneurs, social and business leaders, creators, researchers and other change agents. This was for promoting and connecting initiatives of creativity and innovation for susta

आंबेडकर अपने आप में एक बड़ी मिसाल है!

  आंबेडकर जयंती 2022 / 14 अप्रेल / लेख   आंबेडकर अपने आप में एक बड़ी मिसाल है! फादर डॉ. एम. डी. थॉमस   निदेशक, इंस्टिट्यूट ऑफ हार्मनि एण्ड पीस स्टडीज़, नयी दिल्ली ------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------ 14 अप्रेल को ‘आंबेडकर जयंती’ मनायी जा रही है। डॉ. भीम राव आंबेडकर उनका पूरा नाम था। वे ‘बाबा साहेब’ के नाम से भी जाने जाते हैं। यह दिन ‘समानता दिवस’ भी कहलाता है, इसलिए कि आप ने पूरी ज़िंदगी बराबरी की लड़ाई लड़ी थी। इस दिन को ‘ज्ञान दिवस’ कहने की रिवाज़ भी है, क्योंकि आप बहुत बड़े विद्वान रहे। विश्व के 100 से ज्यादा देशों में आपकी जयंती मनायी जाती है। डॉ. आंबेडकर भारत के संविधान के रचयिता रहे। आप दुनिया के सबसे बड़े और जटिल संविधान के रचयिता भी हैं। आप ‘संविधान के पिता’ कहलाते हैं। आप संविधान के मसौदा समिति के अध्यक्ष चुने गये थे। आप कानून विद्, अर्थशास्त्री, राजनीतिज्ञ, दार्शनिक, लेखक और समाज सुधारक भी थे। आप आज़ाद भारत के पहले कानून मंत्री बने। आपने वित्त आयोग की स्थापना भी की। मृत्यु के 34 साल

No War, But Global Peace!

  No War, But Global Peace / Article No War, But Global Peace! Fr Dr M. D. Thomas Director, Institute of Harmony and Peace Studies, New Delhi ----------------------------------------------------------------------------------------------------------- War between Russia and Ukraine has been on for the past over one month, very tragically so. It has been highlighted that this is the biggest war ever after the Second World War. There is also a fear in the air whether this war is the beginning of the third world war or not. At any rate, the year 2022 is going into the history of the world as a year of heartbreaking memory of brutal war between countries.   In the process of the above war, tens of thousands of lives are no more. Millions of civilians have lost their dear houses and all that they have earned in their life time. Billions and billions worth precious infrastructure, both private and public, are reduced into mere ruins and ashes. The benefits and niceties of the hum

An Enlightened and Responsible Conscience is an Asset

  International Day of Conscience 2022 / 05 April / Article An Enlightened and Responsible Conscience is an Asset Fr Dr M. D. Thomas Director, Institute of Harmony and Peace Studies, New Delhi ----------------------------------------------------------------------------------------------------------- ‘International Day of Conscience’ is celebrated on the 05 th day of April. The day was established by the United Nations General Assembly on 25 July 2019. The first International Day of Conscience was observed on 05 April 2020, as well.   A global campaign was launched at the United Nations Organization on 05 February 2019, by ‘Federation of World Peace and Love’, demanding the declaration of the International Day of Conscience.   In due response to the campaign, the UN General Assembly adopted the draft resolution, which was set forth by the Kingdom of Bahrain, with the name ‘Promoting the Culture of Peace with Love and Conscience’ on 25 July 2019.   Accordingly, the

Spread Happiness, all over!

  International Day of Happiness 2022 / 20 March / Article Spread Happiness, all over! Fr Dr M. D. Thomas Director, Institute of Harmony and Peace Studies, New Delhi ----------------------------------------------------------------------------------------------------------- ‘International Day of Happiness’ is celebrated on the 20th day of March. It was established by the  United Nations General Assembly  on 28 June 2012. The day aims to make people around the world realize the importance of happiness in public policies and practices as well as within their lives.   The United Nations organized the first ever conference on ‘Happiness and wellbeing’ in 2012. It was then that it was decreed that ‘International Day of Happiness’ will be observed every year. It was first celebrated in 2013, as well.   The General Assembly of the United Nations has thus invited its Member States and organizations to observe the day. It has invited all international, regional and national org